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Bollywood Lyricist Meenu Singh Celebrates Her 25 Years In Bollywood

Bollywood Lyricist Meenu Singh Celebrates  Her 25 Years In Bollywood

Lyricist Meenu Singh is celebrating her 25 years in bollywood this year. She has the distinction of working with popular Singers,  Music Directors & Producer –  Directors  viz Mahinder Kapoor, Bhappi Lehri,  DAVID DHAWAN, ANU MALIK, DALER MEHNDI, MIKA, BALI BRUMBHAT, SHAAN, SHEREYA GOSHAL, SONU NIGAM, VINOD RATHOD, UDIT NARAYAN  and the list goes on.

Presently, Meenu is writing for Bappi Lahiri’s compositions. She has even penned the lyrics of Asha Bhosle’s forth-coming album. Poetry has always been her passion, says Meenu. She was born and brought up in Jalandhar but the passion became a profession when she moved to Mumbai. “My husband has been a great support”. But my inspiration has been Anand Bakshi. His songs are cherished.

Bollywood lyricist Meenu Singh, is now toning up for the Mrs India beauty contest for which she has prepared herself. She  will be walking on the ramp. It was only last year while watching the contest that the idea of participation  struck Meenu. “I have hired a personal trainer and have lost nearly 8 kg in four months,” she says.

    

Meenu’s journey as a lyricist began in 1996. “I met singer-composer Bali Brahmbhatt and he liked my collection of songs and I got my first break. His song Kook Kook Kooky, which I penned became a big hit.” After that there was no looking back, she says. “I worked with Bappi Lahiri, Daler Mehandi, Mika, Mahender Kapoor, Labh Janjua and others.” She has written the lyrics for the movies Chor Machaye Shor; String and Topless.

“Till date, I have penned lyrics for over 60 songs”. “Old is gold. The magic of old songs created can be recreated even today,” believes Meenu. Now is modeling time for Meenu. “I have already been selected among the top 50 contestants and I’m confident that I shall also be short-listed among the top 25,” she says.

Soni Jha Got Recognition From Unique Poetry Writing

अनोखे काव्य लेखन से मिली पहचान – सोनी झा

प्रेरणा और अलग नजरिया जिसमें होता है। वह अपने कविता के जरिए लोगों में एक बेहतर अनुभूति कराता है। अपने काव्य से लोगों में एक उमंग जगाता है। शब्दों की सजावट और शब्दों के साथ उसका सही वर्णन जो कोई करता है उसे ही एक काव्य कलाकार कहते हैं। यह कलाकार हमें निसर्ग एवं समाज से जोड़ें रखते हैं।

ऐसी ही एक कलाकार के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जो अपने काव्य से लोगों का मन लुभा रही है। सोनी झा, जो कि झारखंड के जमशेदपुर शहर से हैं उनके पिता पुलिस में देश की सेवा कर रहे हैं और माताजी ग्रहणी है, सोनी झा अपने बाल रूप से ही लोगों और लोगों के मन के साथ जोड़ी है। शायद यही कारण है कि वह इतनी बेहतरीन कविताएं लिखती है, जो लोगों के मन को लुभा जाती है और लोगों को सोचने पर विवश कर देती है।

वह एक तरह से शब्दों को पीरों कर और शब्दों की नक्काशी कर उसे एक काव्य रूप देती है जिसे लोग पढ़े बिना रह नहीं पाते और उसमें ही लीन रह जाते हैं। उनका कहना है कि कविताएं लिखने से पहले कल्पना और अद्भुत विचारों का मिश्रण होना बहुत ही जरूरी है जिससे वह कविताएं और भी खूबसूरत हो जाती है।

उनका यह भी मानना है कि आजकल लोगों में प्रेरणा की कमी हो गई है। लोग अपने और अपने प्रकृति से दूर होते जा रहे हैं। वह चाहती है कि उनकी कविताएं लोगों को प्रेरणा दें। उनकी यही महान सोच उन्हें एक बेहतरीन कवियत्री बनाती है। उनकी कविताओं में इस तरह की सभी खूबियां हैं जो एक इंसान को बदलने के लिए काफी है।

 

बंजारो की ज़िन्दगी

बंजारो सी लगती है अब ये ज़िन्दगी…

रेगिस्तान की रेतों की तरह…

हाथों से फिसलती ये ज़िन्दगी…

ना जाने किस मोड़ पर आकर रूकेगी…

ख्वाहिशों के मौसम में…

बदलाव की बयार ना जाने…

किस आंगन में जाकर खत्म होगी।

हारते हुए इंसान को…

इश्क़ की तन्हाइयों ने ज़ख़्म काफी गहरा दिया है वक़्त की अदालत ने…

सबका चेहरा बेनकाब किया…

किसी ने आकर मेरे ज़ख़्म सिले नहीं…

उस गहरे ज़ख़्म पर…

मरहम भी खुद से लगाई हूं जो मेरे अपनों की खंजर से मिली है।

बार बार उठने की कोशिश भी….

नाकाम सी लगने लगी है ,हर दफा…

रिश्तों की किश्त ढोते ढोते…

ज़िन्दगी उलझ सी गई है ।अपनी उलझन को…

सुलझा सुलझा कर…

अब थक सी गई हूं।

आंखों में नमी…

अब बचा नहीं, किसी और से अब दिल लगा नहीं…

किसी के इंतजार में…

पत्थर दिल सी हो गई हूं…

ख्वाब टूटकर बिखर गए…

मगर किस्मत से हार नहीं मानी हूं। तन्हाइयों का साथ देते देते…

खुद को कही भूल बैठी हूं…

खुशियों की दस्तक से…

इक अनकही सी फासला बना बैठी हूं …

अब खुद को सौप देना चाहती हूं…

उन खामोशियों को…

जिसके बाद कोई कीमत ना चुकानी पड़ी…

किसी को आवाज़ लगाने की।

अब बस थक कर सो जाना चाहती हूं…

तुम्हारी बाहों में सुकून मिले ऐसी ख्वाइश से खुद को सौप देना चाहती हूं…

उन आसमानों के बाहों में…

जहां से सब कुछ धुंधला सा लगे…

जहां मुझे कोई ढूंढ़ ना सके।

बस बहुत जी ली…

ये खोखली सी ज़िन्दगी…

अब हार जाना चाहती हूं…

खुद की ख्वाहिशों भरी उम्मीदों से…

धड़कन को बंद कर ,अपनी सांसों को मिला देना चाहती हूं…

आसमानों के खुली फिज़ाओं में, सोचती हूं …

एक बार ही सही अपने ख्वाब को मुकम्मल कर लूं…

अपनी होंठों की मुस्कान को…

फिर से वापिस ले आऊ…

छोड़ जाऊ जमाने के  इन रीति रिवाजों को…

और जी लू अपने अल्हड़पन को…

बेझिझक सी, बेपरवाह सी, बेधड़क सी, बेख़ौफ़ सी ।।

 

खुशियों की तलाश

ना ही तुम हमें किसी बंधन में बांध पाए ,

ना ही चाहत के सिलसिले में मेरा हाथ थाम पाए।

ख्वाहिशों के मौसम में तुम भी कुछ बदल से गए,

मेरे जज्बातों की आंधी में तुम भी थोड़ा बहक से गए ।

तुम्हें सोच के ख़ुद के ख्वाबों से हम रिश्ता निभा नहीं पाए,

तेरे लिए हम सब कुछ पाकर भी खुद से ही हार गए।

हर दफा ,गलत इंसान से इश्क़ करने की गुस्ताखी करते गए ,

मगर ये कम्बक्त दिल भी सबको माफ करके ,दिल के टुकड़ों को खुद से ही जोड़ते गए।

कभी वो मिला ही नहीं, जिनकी मोहब्बत मिलने से छणिक भर भी दिल को सुकून मिले।

जो भी मिले रास्ते में ,बस मेरे टूटे हुए दिल को जोड़कर ,फिर से तोड़ते गए।

हम मोहब्बत की हर तकलीफ को ,दिल के किसी कोने में दफन करते गए।

बार बार टूटकर बिखरने के बावजूद भी किसी और के लिए खुद की ज़िन्दगी को तबाह करते गए।

एक टूटे हुए दर्पण की तरह, अपने दिल के भी टुकड़े टुकड़े करते गए।

हर दफा ना चाहते हुए भी झूठी तसल्ली देकर दिल को दिलासा दिलाते गए।

हर तकलीफों को किनारे रखकर, सुकुन की तलाश में ज़िन्दगी को जिते चले गए।

दिल्लगी ना करने की कोशिश में तुझसे दूर होते गए ,

फिर भी, ना जाने क्यूं , तुझे देखकर ये ख्याल हमेशा बदलते गए।

झूठ और फरेब से भरे इश्क़ की इन गलियों में ,दिल अपना लुटाते गए

मोहब्बत और किस्मत के खेल में जीत हासिल करने की बजाय खुद के दिल को हारते गए।

भला किस्मत से इश्क़ कब जीत पाया है -२

ये जानकर दिल को समझाते गए और इश्क़ की दुनिया में खुद की खुशियां तलाशते गए।

इश्क़ की दुनिया में खुद की खुशियां तलाशते गए ।।

Book Launch Of CA Sudha G Bhushan By Quaiser Khalid IPS Officer

बीएसई इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में सुधा जी भूषण की बुक लॉन्च (International transactions-A Comprehensive Guide) का समारोह प्रभावशाली ढंग से सम्पन्न हुआ, सुधा भूषण मुंबई स्थित इंडिया प्रसिद्ध चार्टर्ड एकाउंटेंट है।  समोरह का आरंभ सरस्वती वंदना की गूंज के साथ दीप प्रजवलावित करते हुए हुआ।

दीप प्रज्वलित करने का शुभ कार्य सुधा जी भूषण, सुनील पाटोदिया, विनय भूषण, सुमन अग्रवाल, नीला पारिख,जेपी गुप्ता व ए.पी. कुमार  के शुभ करकमलों से सम्पन्न हुआ। जितनी भ्व्या इमारत में समारोह हुआ, उतने ही प्रभावशाली व्यक्ति विशेष समारोह में उपस्थित थे|

Mr.Quaiser Khalid, The Inspector General of Police, Maharashtra (Chief Guest),  Ashish Chauhan, MD and CEO of BSE (Guest of Honour), Raj Kumar Joint commissioner of income tax (OSD) Circle -11(2)(2), Shankar Jhadav, MD BSE investments Limited, Ashok Kumar Garg, Ex ED  Bank of Baroda, Jagdish Prasad Gupta, successful business man and Father Sudha Bhushan,  Vinay Bhushan, Founder Taxpert Professionals, Sunil Patodia Ji , Chartered accountant and ex chairman of WIRC of ICAI.

सुधा भूषण अपने २० साल के कार्यकाल में अंगीनित कंपनीज को इंडिया में स्थापित करने, इंडिया से बाहर कंपनीज establish   करने, उनकी सर्वोत्तम स्ट्रेटजी बनाने, उनका optimum tax structuring   करने का काम कर चुके है|

बुक का विमोचन करते हुए श्री खालिद जों खुद भी एक लेखक है, ने कहा कि कोई भी बुक किसी व्यक्ति के विचारो का आयना होती है|

श्री खालिद की स्पीच की सरल भाषा ने समारोह की शोभा में चार चांद लगा दिए। बुद्धिजीवियों का एक अद्भुत सामंजस्य देखकर श्रोता भी आन्नादित थे। सुधा जी के पिता जी श्री जेपी गुप्ता जी, जों दिल्ली से विशेषकर अपनी बेटी के बुक विमोचन समारोह में सामिल होने के लिए आए थे बहुत ही गौरवान्वित महसूस कर रहे थे।

व्यक्ति विशष श्री सुनील पाटोदिया जों देश के नमिक चार्टर्ड एकाउंटेंट है ने सुधा जी को उनकी सफलता पर बधाई देते हुए कहा कि सुधा जी की शुरू से ही रुचि Foreign International Tax & Laws में रहि  है एवं सुधा जी और विनय जी अपने कार्यक्षेत्र में बहुत ही सराहनीय काम कर रहे है।  सुधा जी ने अपने स्पीच के दौरान बताया कि उनके अनुभव में इंटरनेशनल टैक्स एंड त्रांसाक्शन एक कॉम्प्लेक्स लॉ नहीं है, जरूरत है तो चार कंप्लायंस मनेज करने की।

  • Allowability (w.r.t FEMA Provisions) 
  • Vulnerability (arising out of double Taxation)
  • Explainability (achieved through lucid Documentation) 
  • Accountability (required under Companies Act, 2013, Income Tax Act, 1961 and FEMA, 2000).

सुधा जी ने अपनी स्पीच को आगे बढ़ाते हुए कहा कि टैक्स जितना सिम्पल हो उतना ही अच्छा है, उन्होंने कहा कि वो अपने कार्य द्वारा मोदी जी के ५ ट्रिलियन इकॉनमी के सपने में योगदान देना चाहती है।

विनय जी ने इंटरनेशनल लॉ पर अपने विचार व्यक्त करते हुए बताया कि कंप्लायंस एंड डॉक्यूमेंटेशस की महत्वपूर्ण ता बहुत बढ़ गई है। एक मल्टीनेशनल कंपनी को बेशक हर लॉ का ध्यान रखना चाहिए। जन्हा तक क्रॉस बोर्डर ट्रांसाक्शन की बात है, उसके अपने नुआंसज है जो सभी  कंसर्नेड को समझने चाहिए और दुनिया दिन प्रतिदिन छोटा होता जा रहा है इसलिए जरूरत है की मल्टीनेशनल कंपनीज को अपनी पॉलिसीज, पूरे लॉज को मध्यनजर रखते हुए बनानी चाहिए।

बुक लॉन्च के साथ साथ समारोह में डिजिटल इकॉनमी की के मुद्दों पर भी चर्चा हुई। चर्चा में शामिल अतिथिगणों Amit Sheth, co founder and director Aurionpro Solutions Limited., Mr. K. Balachandran Co founder IRIR, Mr. Amol Lone, Head Finance and IT, Fermenta biotech limited),  ने बहुत ही उत्तीर्ण ढंग से अपने विचार व्यक्त किए। समारोह का समापन भागवत गीता के  लीडरशिप लैशंस के साथ हुआ, जिसमें श्री कृष्ण चेतन्य दास, HOD. Department of Integrated Preaching at ISKCON Juhu Mumbai., ने  गीता को कॉरपोरेट वर्ल्ड के लिए एक सूत्रधार में बांध दिया।


Interview Of Manjusha Ranjan Book Author Of Khila Kamal Pursharth Desh Ka

Interview Of Manjusha Ranjan Book Author Of Khila  Kamal Pursharth Desh Ka

हिन्दि की महान साहित्यकार एवमं कवित्री मंजुषा रंजन, की लिखी किताब खिला कमल पुरसार्थ देश का,महामहिम राष्ट्रपति रामनाथ गोंविद के कर कमलों द्वारा विमोचन किया गया,मंजुषा रंजन ने हिन्दी कविता की अस्मर्णी सेवा की है, और अपने कलम से नये युग का अविष्कार किआ है,जन जन में देश भक्ति की चेतना जगाई,आपको बता दे की मंजुषा रंजन का रविवार दिनांक 8 दिसंबर को मुम्बई में हुआ भव्य स्वागत,बॉलीवुड और राजनीतिक छेत्र के तमाम हस्तियों से हुई मुलाकात,कई संस्थाओं द्वारा सम्मान,हाल ही में मोरिसस में 200 से ज्यादा देश के कवि वहा आये थे, जहाँ उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया, गौरतलब हो कि खिला कमल पुरसार्थ देश का इन्होंने खुद लिखा है,

 

हर ज्वलनशील मुद्दों पर बड़े ही बेबाकी से अपनी राय रखती है,चाहे वो ट्रिपल तलाक का मुद्दा हो,चाहे राम मंदिर का मुद्दा,चाहे नमामि गंगे हो,या फिर बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ,हाल ही हैदराबाद वाले कांड पर भी खुल कर अपनी राय रखी,और उन्होंने क्या क्या कुछ कह देखिए पूरी रिपोर्ट

AUTHOR MANOJ YADAV TO LAUNCH HIS NEW BOOK – 101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT AT TITLE WAVES BANDRA MUMBAI ON 31ST AUGUST 2019

AUTHOR  MANOJ YADAV TO LAUNCH HIS NEW BOOK – 101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT  AT TITLE WAVES  BANDRA MUMBAI ON 31ST AUGUST  2019

Manoj Yadav will launch his debut book ‘101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT’ from the genre Business and Management by Vitasta Publishing Private Ltd, a leader in non-fiction.  It is a 3-in-1 book for effective decision-making with 500+ strategies for business success.

101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT’ can be described as an innovative and well-researched work on Project, Quality, and Risk management, where for the first time Manoj is detailing in-depth around 98% risks affecting projects and strategies to mitigate them.

“101 SECRETS OF PROJECT RISK MANAGEMENT is a book which revolves around project management to survive in a world driven by volatility, uncertainty, complexity, and ambiguity (VUCA). I worked for various MNCs and saw huge gap, as professionals were finding it hard to manage their projects even after various professional certifications. There were complexities around and focus was on theoretical concepts. It is because of this I decided to write a practical book on project management, operational risk, and quality management by which people will have ready solutions to do their daily work and this will enhance their performance.” says Manoj Yadav

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